''कविता- ''परिवर्तन
बदल रहा है व़क्त अब,बदल रही है चाल,
बेटा कहता बाप से क्या है बेटा हाल।
पानी आँखों का मरा, मरी शर्म और लाज,
कहे बहु अब सास से घर में मेरा राज।
छिन्न भिन्न सपने हुए तार-तार विश्वास,
माता-पिता को दे दिया बेटों ने वनवास।
नर्इ सदी से मिल रही दर्द भरी सौगात,
बेटा कहता बाप से,क्या तेरी औकात।
मुस्टंडो को पूजते और नवाते शीश,
पानी माँगे बाप तो नखरे करते बीस।
मरने लगी संवेदना,खत्म हुआ सदभाव,
पूरब पर भी हो गया पशिचम का प्रभाव।।
महेश खरे 'गुरू,टीकमगढ़ (म.प्र.)
बदल रहा है व़क्त अब,बदल रही है चाल,
बेटा कहता बाप से क्या है बेटा हाल।
पानी आँखों का मरा, मरी शर्म और लाज,
कहे बहु अब सास से घर में मेरा राज।
छिन्न भिन्न सपने हुए तार-तार विश्वास,
माता-पिता को दे दिया बेटों ने वनवास।
नर्इ सदी से मिल रही दर्द भरी सौगात,
बेटा कहता बाप से,क्या तेरी औकात।
मुस्टंडो को पूजते और नवाते शीश,
पानी माँगे बाप तो नखरे करते बीस।
मरने लगी संवेदना,खत्म हुआ सदभाव,
पूरब पर भी हो गया पशिचम का प्रभाव।।
महेश खरे 'गुरू,टीकमगढ़ (म.प्र.)
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