गजल... औरत- हाजी जफरउल्ला खां जफर टीकमगढ म. प्र.
सारे आलम की ही पहचान सिर्फ औरत है,हर जवां मर्द की मुस्कान सिर्फ औरत है।
उसी के दम से है रौनक जहान मे कायम,
मर्द पर जां करे कुर्बान सिर्फ औरत है।
शर्म आखो मे लिये साथ हया का जेबर,
अदबो ममता की ही सुल्तान सिर्फ औरत है।
धर गृहस्थी के सभी काम वही करती है,
हर इक धर की निगहबान सिर्फ औरत है।
अपने बच्चो को ही बचपन से वो सिखाती है,
कराये हर्फ की पहचान सिर्फ औरत है।
है बहन बेटी मा भी सास दादी भी,
असमते इन्सां की निगहवान सिर्फ औरत है।
करो न उसको परेशान कीजिये इज्जत,
जफर धरो की ही जीशान सिर्फ औरत है।।
हाजी जफरउल्ला खां जफर टीकमगढ म. प्र.
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