योगदान देने वाला व्यक्ति

शनिवार, 8 जून 2013

नारी की समस्या और उनका समाधान......R S sharma tikamgarh


नारी की समस्या और उनका समाधान - आर एस शर्मा ..... टीकमगढ

आज विश्व परिदृश्य को देखे तो नारी का अबला रुप दासी चारी और भोग्या का अधिक सृजनशीलता महाकाली और वीरांगना का रुप कम दिखायी देता है। जलती बहुये दहेज के लिए प्रताडित होना, बूढी होती बाल विधवाये, टूटते परिवार ,भ्रूण हत्याओ के फलस्वरुप धटता हुआ लिंगानुपात तथा कइ तरह के शोषण एंव दुराचार की शिकार को रही है नारी। वर्तमान मे दामिनी हत्याकांड से उपजी नारी चेतना ने पूरे भारत मे एक स्वत स्फूर्त आंदोलन का रुप लिया है तथा देश मे नारी असिमता और सुरक्षा का वर्ष मनाने का संकल्प हुआ है शताबिदयो से चली आ रही नारी की त्रासदियो की सिसकियो ने जनमानस की झकझोर दिया है उनकी समस्याओ के प्रति समाज और शासन मे संवेदनशीलता जागी है।
   धार्मिक ग्रंथो मे नारी की सार्वभौमिक महिमा का वर्णन किया गया है - यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमने तत्र देवता - जहा नारी का आदर होता है वहा देवता निवास करते है सरस्ती बुद्धि की देवी लक्ष्मी धन की देवी दुर्गा शौर्य की देवी और गायत्री सम्पूर्णता की देवी मानी गइ है । भारत मे रजिया सुल्ताना ने अपने बुद्धिमत्तापूर्ण कुशल शासन से तथा रानी लक्ष्मीबाइ ने अपनी वीरता तथा रणकौशल से साबित किया था कि किसी भी क्षेत्र मे नारी कम नही है आज नारी शिक्षा साहित्य कला राजनीति समाज सुधार कृषि व्यापार सिनेमा एंव उधोग जगत पुलिस फौज तथा खेल आदि मे बढ चढ कर हिस्सा ले रही है माह जनवरी 2013 को एक समाचार पत्र मे सात फौजी महिलाओ का फोटो छपा था जिन्होने दुनिया की सबसे उची चोटी एवरेस्ट की चढाइ मे सफलता प्राप्त की है
     जहा तक समानता और समान अधिकार का प्रश्न है इस संबध मे पुरुष और महिला को सम्यक बुद्धि व विवेक से व्यवहार करने की आवश्कता है आजकल धन की लालच मे टी. व्ही. के विज्ञापन मे नारी अद्र्धनग्नता की सीमा भी लाध रही है नारी को आत्मनिर्भर व शिक्षित होना होगा शासन की ओर से भी महिलाओ की सुरक्षा और विकास के लिए व्यापक प्रयास उठाये जा रहे है। जैसे धरेलू हिंसा से महिला संरक्षक अधिनियम 2005 भारतीय दण्ड संहिता मे महिला संरक्षण म. प्र. शासन की लाडली लक्ष्मी योजना मुख्यमंत्री कन्यादान योजना तथा भावनात्मक संबल हेतु परिवार परामर्श केन्द्र आदि के प्रावधान है।
     भारतीय संस्कृति के अनुसार सनातन काल से चले आ रहे आदर्शो का अनुकरण करना होगा जीवन मे एक दूसरे के प्रति सहनशीलता व संवेदनाशीलता के अभाव मे करोडो की दौलत होने के बावजूद भी दुख ही दुख रहता है। मानवीय मूल्य सर्वोपरि है ।।      R.S. Sharma tikamgarh

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें